पूजा एवं कलश स्थापना | 11 अक्टूबर 2026
माँ भगवती की पूजा-अर्चना एवं विधि-विधान से कलश स्थापना।
युवाओं की सहभागिता से धर्म, संस्कृति और मर्यादा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास।
श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा एवं जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने तथा रामायण की प्रेरणादायक कथाओं के माध्यम से धर्म, सत्य और संस्कारों का संदेश देने का प्रयास।
स्थानीय युवाओं की सक्रिय सहभागिता से रामलीला के आयोजन, भव्य मंचन एवं समस्त व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाता है।
नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, मर्यादा और धार्मिक मूल्यों से जोड़ना।

परंपरा, संस्कृति और भक्ति का आकर्षक मंच|
बादशाह नगर की रामलीला हमारी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और भाईचारे की अमूल्य धरोहर है। वर्ष 1994 में श्री राम करन चौहान, श्री पुत्ती लाल रावत, श्री शिव प्रसाद राजपूत, श्री जगदेव राजपूत, श्री शिव बक्श चौहान, श्री कन्हैया लाल वर्मा एवं श्री छवि नाथ चौहान के मार्गदर्शन में इसकी शुरुआत हुई। लगभग 2013 में श्री सुमित कुमार मिश्रा एवं श्री पुत्ती लाल रावत के निर्देशन में कुछ वर्षों के विराम के बाद रामलीला का पुनः शुभारंभ हुआ और 2017 में श्री रवि कुमार यादव के सुझाव पर इसका नाम नव युवक रामलीला समिति रखा गया। इस पावन परंपरा को जन्म देने और आगे बढ़ाने वाले सभी श्रद्धेय पूर्वजों एवं समाजसेवियों को शत-शत नमन, जिनके संस्कार और रामभक्ति की ज्योति आज भी हमें प्रेरणा देती है। आइए, इस अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाते हुए भगवान श्रीराम के सत्य, मर्यादा, त्याग, धर्म और सदाचार के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। जय श्रीराम।
The Ramleela of Badshah Nagar is not merely a religious event, but a cherished symbol of our faith, cultural heritage, social unity, and brotherhood. In 1994, the tradition began under the guidance and direction of Shri Ram Karan Chauhan, Shri Putti Lal Rawat, Shri Shiv Prasad Rajput, Shri Jagdev Rajput, Shri Shiv Baksh Chauhan, Shri Kanhaiya Lal Verma, and Shri Chhavi Nath Chauhan. Around 2013, after a brief pause, Ramleela was revived under the direction of Shri Sumit Kumar Mishra and Shri Putti Lal Rawat. In 2017, on the suggestion of Shri Ravi Kumar Yadav, the organization was named Nav Yuvak Ramleela Samiti. We respectfully pay tribute to all the revered elders and community members who laid the foundation of this sacred tradition and whose dedication and values continue to inspire us. May this precious legacy continue to guide future generations through the ideals of truth, righteousness, sacrifice, dignity, and devotion taught by Lord Shri Ram. Jai Shri Ram.
नवरात्रि के नौ दिनों में रामायण की पावन कथा को क्रमवार मंचित किया जाएगा।
माँ भगवती की पूजा-अर्चना एवं विधि-विधान से कलश स्थापना।
माता रानी की आराधना, भजन-कीर्तन एवं मंगलमय पूजा-अर्चना।
माँ भगवती की पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ भक्तिमय आयोजन।
श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग तथा सीता-राम के पावन विवाह का मंगलमय प्रसंग।
कैकेयी के वरदान, श्रीराम का वनगमन और अयोध्या के करुणामय प्रसंग का मंचन।
पंचवटी का प्रसंग, स्वर्ण मृग और रावण द्वारा माता सीता के हरण का मंचन।
श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, हनुमान जी का लंका गमन और लंका दहन का रोमांचक प्रसंग।
मेघनाद द्वारा लक्ष्मण जी पर शक्ति प्रहार एवं हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने का वीरतापूर्ण प्रसंग।
दिन में श्रीराम द्वारा रावण वध एवं भव्य मेले का आयोजन तथा रात्रि में श्रीराम के अयोध्या आगमन एवं भव्य राजतिलक का मंगलमय समारोह।
नवरात्रि पूजन की पूर्णाहुति के साथ विधि-विधान से कलश विसर्जन एवं मंगल प्रार्थना।
समिति के सदस्यों की सूची।
अध्यक्ष
उपाध्यक्ष
निर्देशक
सह-निर्देशक
सूत्रधार
सलाहकार
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“रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई।”